Saturday, 24 August 2019

तुम ही हो पतवार कान्हा !


जब-जब फैला है तमस, तब-तब किया उजास
अपनों का जमघट, मगर; हो इक तुम ही पास
हो इक तुम ही पास, न दूजा और सहारा
तुम ही हो पतवार, बही जब आँसू-धारा
मन कलुषित की हार, नयन में नेह लबाबब
धडकन बनी तरंग, मगन कान्हा में दिल जब !!! 

चित्र:गूगल

                                                              

6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 24 अगस्त 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  3. बहुत सुंदर भावपूर्ण सृजन।

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  4. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं!!


    ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 24/08/2019 की बुलेटिन, " कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. वाह बहुत ही शानदार ....

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