Friday, 13 February 2015

प्यार ...




प्यार.....
खिलती मुस्कान, आँसू की ज़ुबान भी है !
फूलों की ख़ुश्बू , काँटों का सामान भी है !
सूरज की तपिश, बारिश का वरदान भी है !
तन्हाई का साथी, भीड़ में बियाबान भी है !
स्पर्श की मीठी सिहरन , तंज़ से लहुलुहान भी है !
पोखर में कमल, सागर में तूफ़ान भी है !
अमावस की रात, चाँदनी का अरमान भी है !
विरह की बदरी , पपीहे की तान भी है !
धड़कन की सरगम , जिस्म की जान भी है !
हर जवाब की बुनियाद, हर सवाल का एहतराम भी है !
प्यार.....
जीवन का आग़ाज़ , जीवन का अंजाम भी है...!!!


11 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-02-2015) को "कुछ गीत अधूरे रहने दो..." (चर्चा अंक-1890) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    पाश्चात्य प्रेमदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर! प्यार नाम है देने का, और देकर खुश रहने का ...

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  3. ग़र मिल जाये सच्चा प्यार ...तो उपर वाले का वरदान भी है ....
    खुबसूरत दिल से निकले ..... खुबसूरत भाव |
    शुभकामनायें|

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  4. ग़र मिल जाये सच्चा प्यार ...तो उपर वाले का वरदान भी है ....
    खुबसूरत दिल से निकले ..... खुबसूरत भाव |
    शुभकामनायें|

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  5. सराहना तथा प्रोत्साहन के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद एवं आभार !
    ~सादर

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  6. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण प्रस्तुति...

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  7. बहुत ही सुंदर और उतने ही सुंदर भाव। अच्‍छी रचना प्रस्‍तुत करने के लिए बधाई।

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