Thursday, 24 May 2012

ज़िंदगी...एक कविता...


कुछ हंसते, कुछ गमगीन लम्हे....लपेट कर चलती है ये ज़िंदगी..!
कभी सातवें आसमान पर खिलखिलाती... 
तो कभी किसी गढ़े में सहमी सी...अक्सर मिलती है ये ज़िंदगी..!
समय बढ़ता जाता है.....
मगर कभी-कभी थक कर.. थम जाती है ये ज़िंदगी...!
कभी सुक़ून-ओ-चैन के संग...
कभी विरोधाभास में... जीती है ये ज़िंदगी..!
दिल में उमड़ते घुमॅडते जज़्बातों के, एहसासों के रेले...
सब झेलती है... ये ज़िंदगी !
कभी हालातों का हाथ थामे...
कभी बग़ावत करती है... ये ज़िंदगी..! 


जब कभी भी छलकी... किसी कोरे काग़ज़ पर..
अपने चेहरे की सारी आडी-तिरछी लकीरें खींचकर...
अपना नाम लिख जाती है...ये ज़िंदगी.....


दुनिया उसे कविता समझकर पढ़ती है...
मैं बस जीती जाती हूँ ...वो ज़िंदगी..!

19 comments:

  1. दुनिया उसे कविता समझकर पढ़ती है...
    मैं बस जीती जाती हूँ ...वो ज़िंदगी..!

    सुन्दरता से पिरोया ज़िन्दगी का फलसफा ..........

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    1. This comment has been removed by the author.

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया ! :-) और स्वागत है आपका ब्लॉग में !:)
      यूँ ही हौसला बढ़ाते रहिएगा...

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  2. सच कहा आपने जिंदगी एक कविता ही तो है जिसकी धूप और छाँव के अजब गजब रंग हैं।

    सादर

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद! यशवंत जी! आप यहाँ आए, ये कविता पढ़ी, सराही, इसके लिए आपका आभार !

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  3. कल 27/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. यशवंत जी, ये कविता आपको पसंद आई, इसके लिए हमें बहुत खुशी है! इसको चुनने के लिए और जानकारी के लिए बहुत धन्यवाद ! :-)

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  4. एक निवेदन
    कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।
    इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।
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    अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-
    http://www.youtube.com/watch?v=VPb9XTuompc

    धन्यवाद!

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  5. धन्यवाद अनीता जी
    आप मेरे ब्लाग में आई
    आपकी रचना को मैं सुबह ही शेयर कर ली थी
    धन्यवाद फिर एक बार
    सादर
    यशोदा

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    1. यशोदा जी, आपका तहे दिल से धन्यवाद ! इसे आप अपना ही समझिए ! :-)

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  6. रीना मौर्या जी, तहे दिल से धन्यवाद ! हौसला-अफज़ाई के लिए बहुत शुक्रिया !:)

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  7. "दुनिया उसे कविता समझकर पढ़ती है...
    मैं बस जीती जाती हूँ ...वो ज़िंदगी..!"

    आपको एक अरसे से पढ़्ती आई हूँ और आपके भावों ने सदा ही प्रभावित किया है।
    "नई पुरानी हलचल" में आपका स्वागत है!

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  8. jindagi yahi to vividh rang dhang hai, jis par jindagi chalti rahti hain..
    bahut sundar rachna

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद कविता रावत जी !
      स्वागत है आपका ब्लॉग में! :-)

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  9. sundar rachna. yahi to hai zindagi.

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  10. बहुत बहुत धन्यवाद Onkar जी ! :)

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  11. पहली बार आपको पढ़ा भविष्य में भी पढना चाहूँगा इसलिए आपका फोल्लोएर्स बन रहा हूँ

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद....संजय भास्कर जी !
      आपका स्वागत है ! अपने feedback से शोभा बढ़ाते रहिएगा और उत्साह बढ़ाते रहिएगा..!:-)

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