Saturday, 13 October 2012

**~टप...टप...टप...~ बूँदें एकाकीपन की...~**


रात का सुनसान सन्नाटा...
जब हर आवाज़, हर हलचल...
सो गयी  ...खामोशी से......!
अचानक सुनाई पड़ी तभी..
एक आवाज़...
टप...टप...टप... 
सन्नाटे को चीरती हुई !
शायद किसी नल के टपकने की....!
दिन भर के शोर में जिसका पता ही न चला.....
मगर... रात में उस एक आवाज़ के सिवा....
और कुछ भी... सुनाई न दिया...!
अंदाज़ा लगाया ...उस आवाज़ से उसकी ताक़त का...
ऐसा लगा , जैसे धरती को ही छेद कर रख देगी....!

महसूस होता है ऐसा ही कुछ ...
जब छाता है...मेरे अंतस में.....
गहन अंधेरा...घोर सन्नाटा ...
और हो जाते  हैं...
सारे एहसास, सारे जज़्बात गूँगे...
सुनाई पड़ती है तब......
कुछ ऐसी ही आवाज़........ 
चीरती हुई मेरे वजूद को....
टपकती हैं जब......मेरे दिल में...
'एकाकीपन' की बूँदें.......
टप...टप...टप........

28 comments:

  1. वाह...
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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    1. शास्त्री सर, प्रोत्साहन देने का बहुत बहुत आभार !:)

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    1. Thank you so much.... धीरेन्द्र अस्थाना जी !:)

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    1. धन्यवाद... महेन्द्र श्रीवास्तव जी !:)

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  4. Khamosh anshuon ke zazbzto ki behataree prastuti

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    1. शुक्रिया..... Aziz Jaunpuri ji !:)

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  5. महसूस होता है ऐसा ही कुछ ...
    जब छाता है...मेरे अंतस में.....
    गहन अंधेरा...घोर सन्नाटा ...
    और हो जाते हैं...
    सारे एहसास, सारे जज़्बात गूँगे...
    सुनाई पड़ती है तब......
    कुछ ऐसी ही आवाज़........
    चीरती हुई मेरे वजूद को....
    टपकती हैं जब......मेरे दिल में...
    'एकाकीपन' की बूँदें.......
    टप...टप...टप........, एक एक एहसास मन के करीब की अनुभूतियों को छू गए

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद...रश्मि जी ! :)

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  6. और ये एक बूँद लहुलुहान कर जाती है पूरे वजूद को.......

    बहुत सुन्दर.....
    सस्नेह
    अनु

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    1. शुक्रिया......अनु !:)

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  7. अनिता जी आपकी यह कविता मर्म के प्रत्येक रेशे को तरबतर कर देती है । ये पंक्तियाँ तो भावों की भीनी खुशबू से ओतप्रोत हैं -महसूस होता है ऐसा ही कुछ ...
    जब छाता है...मेरे अंतस में.....
    गहन अंधेरा...घोर सन्नाटा ...
    और हो जाते हैं...
    सारे एहसास, सारे जज़्बात गूँगे...
    सुनाई पड़ती है तब......
    कुछ ऐसी ही आवाज़........
    चीरती हुई मेरे वजूद को....
    टपकती हैं जब......मेरे दिल में...
    'एकाकीपन' की बूँदें.......
    टप...टप...टप........

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    1. तहे दिल से आपका धन्यवाद व आभार !:)
      सादर !

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  8. gahan abhivyakti......

    Regards.
    -aakash

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    1. शुक्रिया... आकाश !:)

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  9. gahan abhivyakti......

    Regards.
    -aakash

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  10. खूबसूरत और संवेदनशील रचना जो एकाकीपन के अहसास को बढ़ाती है और झकझोरती है ..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया.... Vandana KL Grover ji !:)

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    1. शुक्रिया.... यशवंत !:)

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  12. चीरती हुई मेरे वजूद को....
    टपकती हैं जब......मेरे दिल में...
    'एकाकीपन' की बूँदें.......
    टप...टप...टप........

    उम्दा प्रस्तुती।
    आपके इन शब्दों का तो कोई तोड़ नही है जी।



    कभी मेरे ब्लॉग पर भी आईये
    http://rohitasghorela.blogspot.com/2012/10/blog-post_17.html

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  13. संवेदनशील एक ख़ूबसूरत रचना

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद... चन्द्र भूषण गाफिल जी ! :)
      ~सादर !!!

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  14. http://vyakhyaa.blogspot.in/2012/10/blog-post_18.html

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद... रश्मि जी ! :)
      ~सादर !!!

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  15. टपकती हैं जब......मेरे दिल में...
    'एकाकीपन' की बूँदें.......
    टप...टप...टप........

    पढ़ कर ऐसा लगा कि जैसे मेरे मन के भाव आपकी कलाम से निकले हैं .... बहुत सुंदर

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