तर-ब-तर हूँ....गम-ए-ज़िंदगी में, सराबोर......बेबस अरमानों के समंदर में...! कपड़ा नहीं कि निचोड़ लो, न ही प्याला..कि खंगाल लो... भीगी हुई रेत हूँ.... एहसासों की तूफ़ानी लहर में ! क़तरा क़तरा मौत ... की अता... जो तेरे वजूद ने... किया जज़्ब उसे ....मेरी रूह ने.....!
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