Monday, 12 May 2014

~**माँ तो हल्दी-चन्दन'~ माहिया**~

1
आँखों में है सावन
दिल ममता-आँगन
माँ तू कितनी पावन।

2
हर दुःख को सह जाती
उफ़ न कभी करती
माँ तो बस मुस्काती !

3
आँचल में हैं सारे 
मुन्ने के सपने
क्या चन्दा , क्या तारे। 

4
जिस घर माँ मुस्काती
ईश्वर की बाती
कण-कण नूर खिलाती।

5
माँ पहला आखर है
नींव बने घर की
माँ  ऐसा पत्थर  है  ।

 6.
सबको जीवन देती
 सहती धूप कड़ी
अपने सपने पीती  ।

7
कैसा दुःख क्या चिंतन
दर्द सभी भागें
माँ तो हल्दी-चन्दन।

8.
रिश्तों को वो सीती
छुपकर है  रोती
माँ घुट-घुट कर जीती।

9.
जीवन भर ना हारी
अब जब उम्र ढली
अपने बदलें पारी !

10
अपने दिल में पाती 
बेटी की धड़कन
माँ की प्यारी साथी ।

11
माँ के भीगे नैना
जो ना पढ़ पाए 
उसका क्या है जीना ।

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (13-05-2014) को "मिल-जुलकर हम देश सँवारें" (चर्चा मंच-1611) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुंदर माहिया ...!!

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  3. माँ की सम्पूर्णता को व्यक्त करते हुए बहुत ही भावपूर्ण कविता... बेहद सुन्दर प्रस्तुति !!

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  4. माँ और सुन्दर माहिए ... माँ को समर्पित अनुपम रचना ...

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  5. आप सभी का ह्रदय से आभार :-)

    ~सादर

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  6. .. माँ को समर्पित अनुपम रचना

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  7. बेहद सुंदर और ममत्व से भरी रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  8. मन को छूते शब्‍दों का संगम ..........

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  9. bahut sundar madhur prastuti Anita ji
    haardik badhaaii !!

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  10. ब्लॉग पर प्रकाशित सारी रचनाएँ बहुत ही मन मोहक और उम्दा है.
    बेहतरीन सृजन के लिए हार्द्धिक शुभकामनाये और बधाइयाँ

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  11. प्रोत्साहन देने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार... :-)

    ~सादर

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  12. bhapurn-****
    ek bar phir aap ke blog ana acha laga

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