Tuesday, 11 February 2014

~**प्यार कब नहीं होता फ़ज़ाओं में ?**~

आसमाँ से बिखरता हल्दी-कुंकुम-महावर,
हवा के मेहँदी लगे पाँवों में उलझती … 
सुनहरी पाजेब की रुनझुन,
आँचल में लहराते-सिमटते चाँद-सितारे,
सुर्ख़ डोरों से बोझिल … 
क्षितिज पर झुकती बादलों की पलकें,
फूलों से टँकी रंग-बिरंगी चूनर की ओट में … 
लजाते हुए धरा के सिन्दूरी गाल ....

~प्यार कब नहीं होता फ़ज़ाओं में ?
काश! हम इंसान बिना शर्तों के प्यार कर पाते...~

30 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, धन्यबाद .

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  2. बहुत ही कोमल अहसासों को समेटे एक प्यारी सी कविता ... बहुत सुन्दर!

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-02-2014) को "गाँडीव पड़ा लाचार " (चर्चा मंच-1521) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आभार शास्त्री सर...

      ~सादर

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  4. काश...बहुत सुंदर लिखा है

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  5. भाई -बहन दोनों की तरफ़ से एक-एक लाइन स्नेह के साथ ....

    काश! हम इंसान बिना शर्तों के प्यार कर पाते
    जिन्दगी समझोता न होती ये एतबार कर पाते .....

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  6. बहुत सुन्दर कविता अनीता जी |

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  7. वाह ... अनुपम भाव संयोजन
    बहुत खूब

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  8. wah wah bahut bahut sundar....man ko bha gayi apki ye rachna

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  9. आप सभी का ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद ! :)

    ~सादर

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  10. हम इंसान बिना शर्तों के प्यार कर पाते....

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  11. प्यार कब नहीं होता----
    पूरी कि पूरी कायनात प्यार ही तो है----नजर चाहिये
    बहुत सुंदर-सरल-सहज

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  12. खूबसूरत एहसास से भरी प्यारी रचना ....

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  13. शानदार प्रस्तुति से साक्षात्कार हुआ । मेरे नए पोस्ट "सपनों की भी उम्र होती है "पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है।

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  14. सराहना व प्रोत्साहन के लिए आप सभी का ह्रदय से धन्यवाद एवं आभार ! :)

    ~सादर

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  15. प्रकृति की हर करवट में प्रेम है प्रतिदिन !
    भावपूर्ण !

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  16. मन में प्यार हो तो सब जगह दीखता है.

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  17. वाकई !!
    काश हम कर पाते !!

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  18. क्षितिज पर झुकती बादलों की पलकें,
    फूलों से टँकी रंग-बिरंगी चूनर की ओट में …
    लजाते हुए धरा के सिन्दूरी गाल ....

    ~प्यार कब नहीं होता फ़ज़ाओं में ?
    काश! हम इंसान बिना शर्तों के प्यार कर पाते...~

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  19. सराहना व प्रोत्साहन के लिए आप सभी का धन्यवाद एवं आभार...! :)

    ~सादर

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  20. बहुत मनमोहक सा है ये "काश" ...... सस्नेह :)

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  21. प्रेममय पोस्ट और सुन्दर कविता के लिए आभार |

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  22. प्रेम तो सदैव और सर्वत्र होता है .. जगत प्रेम माय है , अपने स्वार्थ और माया वश हम प्रेम से दूर होते जा रहे हैं.. बहुत सुन्दर कविता ..

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  23. प्रेम-प्रवण कविता अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। शुभ रात्रि।

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