Thursday, 9 August 2012

** मेरे कान्हा, मेरे केशू...**


मेरा कान्हा, मेरा केशू...
मैया का दुलारा, इस जग का सहारा !
भाए मुझे तेरा रूप सलोना,
नटखट गोपाला.. तू ही खेवनहारा..! 

तेरे हाथों की बंसी.. जीवन नैया मेरी,
तेरी बंसी की धुन.. पतवार मेरी !
हर सुख मेरा.. वरदान है तेरा,
हर दुख में छिपी.. कोई लीला तेरी !

मैं ठहरी नादान.. इस जग से अंजान..!
चलूं छाया में तेरी.. लेकर तेरा ही एक नाम !

तेरी प्यारी सी छवि.. आँखों में सजाए..,
दिल में आस्था का.. अखंड दीपक जलाए,
कर्म डगर पर चली जा रही हूँ...
मुक्ति की अमिट आस दिल बसाए ...!

"जन्माष्टमी" का शुभ दिन, तुझे हो बधाइयाँ ,
तुझपे वारी मैं जाऊँ...लूँ तेरी बलैइयाँ.....!!!

12 comments:

  1. कल 10/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर प्यारी रचना...
    :-)

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  3. भक्तिमयी रचना !
    जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ !

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  4. कान्हा सदा अपना सा ही लगता है.... मनमोहक रचना , जन्माष्टमी की शुभकामनायें ....

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  5. bahot acche...जन्माष्टमी की
    शुभकामनायें .... www.bassar.tk

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  6. bahut hi sundar .......aapki rachna aur keshu dono hi ....

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  7. बहुत बढ़िया कृष्णपगी रचना
    सुन्दर सार्थक सामयिक प्रस्तुति
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

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  8. बहुत भक्ति भाव पूर्ण सुन्दर रचना
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

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  9. बूँद बूँद लम्हे में प्रकाशित आपकी रचानों का आनद लिया खुबसूरत ही नहीं बेहतरीन भावों से सजी आपकी रचना धर्मिता के लिए प्रणाम

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    1. रमाकांत सिंह जी....आपने हमारे ब्लॉग को अपना क़ीमती वक़्त दिया और इसे सराहा...इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद! यूँ ही हौसला बढ़ाते रहिएगा...यही उम्मीद करती हूँ

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  10. तेरी प्यारी सी छवि.. आँखों में सजाए..,
    दिल में आस्था का.. अखंड दीपक जलाए,
    कर्म डगर पर चली जा रही हूँ...
    मुक्ति की अमिट आस दिल बसाए ...!

    सुन्दर भावों से सजी ... मोहम कृष्ण की मोहकता बखान करती मोहक रचना ... जन्माष्टमी की बधाई ..

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  11. आप सभी को... अपना कीमती वक़्त देने और इस रचना को पसंद करने का तहे दिल से धन्यवाद! :-)

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