Tuesday, 29 May 2012

उदासी.....


दबे पाँव आती है, दिल में उतर जाती है.. !
आँखों की महकती डगर... बियाबान कर जाती है... !
होठों से मुस्कान.., जिस्म से जान छीन ले जाती है....!
दिल को बनाकर गुलाम अपना.....
हुक़ूमत उसपर चलाती है !
बिन बुलाए मेहमान सी.....
क्यूँ आई..., किधर से आई..., क्यूँ रौब मुझे दिखाती है... ?
मेरे ही घर में घुसकर...कितना ये इतराती है...?
ज़ंजीरों में जकड़ मुझे.....
क्यूँ  बेबस, लाचार, बेज़ार कर जाती है... ?
ये  '' उदासी ''......
क्यूँ  अपने रंग में रंग कर मुझे......
उदास.....बहुत  उदास... कर जाती है........???

29 comments:

  1. Replies
    1. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी, बहुत बहुत धन्यवाद ! :-)

      Delete
  2. बहुत ही बढ़िया मैम!


    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. यशवन्त माथुर जी, बहुत बहुत धन्यवाद ! :-)

      Delete
  3. कल 31/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. यशवन्त माथुर जी, खुशी है हमें, आपने इस कविता को इतना पसंद किया! 'नयी पुरानी हलचल' में इसे जगह देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया और आभार....!!!:-)

      Delete
  4. बिन बुलाए मेहमान सी.....
    क्यूँ अपने रंग में रंग कर मुझे......
    उदास.....बहुत उदास... कर जाती है........???

    सच .... !
    मेरे साथ तो हमेशा ही हो जाता है .... :D

    ReplyDelete
    Replies
    1. Vibha Rani Shrivastava ji, अक्सर हम सभी के साथ ऐसा होता है ! ये उदासी ऐसी बिन बुलाई मेहमान ही सी तो होती है...
      पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!! :-))

      Delete
  5. waah ji kya baat hai...very well written..

    ReplyDelete
  6. सही कहा ये उदासी बिन वजह ही टपक जाती है..
    और परेशान करती है..
    सुन्दर प्रस्तुति...

    ReplyDelete
    Replies
    1. रीना मौर्या जी, बहुत बहुत धन्यवाद! ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहिए! :)

      Delete
  7. यही तो उदासी का कहर है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. वंदना जी....सच कहा आपने...उदासी का क़हर...!
      बहुत बहुत धन्यवाद! :) यहाँ तक आने का भी बहुत बहुत शुक्रिया !!! :-)

      Delete
  8. "ये '' उदासी ''......
    क्यूँ अपने रंग में रंग कर मुझे......
    उदास.....बहुत उदास... कर जाती है...???"
    a genuine doubt.. :)

    बहुत सुंदर रचना अनीता जी..
    आभार!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद ब्रिजेन्द्र सिंह जी !

      Delete
  9. ये उदासी....
    खूबसूरत रचना...
    सादर।

    ReplyDelete
    Replies
    1. S.M.HABIB Sahb.....बहुत बहुत शुक्रिया ! :)

      सादर

      Delete
  10. उदासी अपना असर छोड़ जाती है ... जहां भी जाती है ...

    ReplyDelete
  11. मासूमियत से सराबोर रचना...इतने सारे प्रश्न और सभी के सभी तर्कसंगत भी लगते हैं....पर शायद ये उदासी भी तो जीवन एक अभिन्न अंग है
    बहुत खूब मैम
    आभार

    ReplyDelete
    Replies
    1. Anjani Kumar ji.....बहुत बहुत शुक्रिया ! :)
      सही कहा आपने ! उदासी भी हम सबके जीवन का एक अभिन्न अंग ही है !

      Delete
  12. यूँ ही तो उदासी नहीं आती कोई कारण जरुर होता है .. बहुत बढ़िया रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. कविता रावत जी...........बहुत बहुत शुक्रिया ! :-))

      Delete
  13. यकायक छाये बादलों सी
    ये उदासी ।
    इसको बहुत अचछे से शब्द दिये आपने । सुंदर कविता ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आशा जोगलेकर जी.... बहुत बहुत धन्यवाद ! :-))

      Delete
  14. वाह बहुत सुन्दर ..तुम्हारी लेखनी में निखार आता जा रहा है ...बहुत सुन्दर, सहज, सच्चे भाव ...!!!!

    ReplyDelete
  15. Thank u so much !:)
    आपकी बातों से बहुत हौसला मिला ! यूँ ही आते रहिए...और हौसला बढ़ाते रहिए... :-)

    ReplyDelete
  16. beautiful..............

    excellent expression anita ji.

    anu

    ReplyDelete
  17. Thank you soooo much......anu ji ! :-)
    Your feedback matters a lot to me ! Plz Keep encouraging !!!

    ReplyDelete