Wednesday, 14 September 2016

~**दिल में बसी~हो जैसे ख़ुशी ! ~ प्यारी बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ !**~

1
बिटिया हँसी
सितारों सी चमकी
आँखों में बसी।

2
नेह अपार 
मेरी गोद समाया
उसे जो पाया।

3
नन्ही -सी कली
मेरी आँखों में पली
महकी गली।

4
पापा की परी
है सबकी दुलारी
जग से न्यारी।

5
"माँ-माँ" कहती
पायल खनकाती
मन लुभाती।

6
हों जैसे मेघा
नेह से लबालब
'नेहा' के नेहा।

7
है मीलों दूर
पर दिल में बसी
वो- जैसे ख़ुशी !

8
उसकी दुआ 
ज्यों मन्नत के धागे 
घर को बाँधे !

9
घर-अँगना
बिटिया बिन सूना 
मन का कोना !

10
दिल की आस
वो घर का उजास 
सदा है पास ! 

~अनिता ललित

Monday, 5 September 2016

~**गणेश-चतुर्थी' एवं शिक्षक-दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ! **~ कुछ हाइकु

1
ॐ गणपति !
कष्ट-विघ्न हरना 
राह दिखाना !


माता प्रथम
संस्कारों की शिक्षिका
नमन उसे।


गुरु जो साथ
लगे ईश्वर-हाथ
दे आशीर्वाद।

4
गुरु सँवारे
शिष्य -मन-जीवन
माँजे, निखारे।


गुरु की शिक्षा
साए -सी संग चले
साथ निभाए।


गुरु की छवि
है सबसे अलग
मन में बसी।


बिना गुरु के
ये दुनिया जंगल
बुद्धि विहीन ।

8
सिखा जाता है
हर ज़ख्म सबक़
सँभलने का।

~अनिता ललित 

Friday, 2 September 2016

~**कुछ हाइकु~ बूँदों की झड़ी**~

बूँदों की झड़ी 
पिरो लाती है संग 
यादों की लड़ी

बीते वो दिन–
जब भीगे थे संग
भीगा था मन।

ओ बूँदो! सुनो!
छेड़ो न वही धुन
होऊँ मगन।

यादों में ढूँढ़ूँ
टिप-टिप बूँदों का
सुरीला गीत।

वो बीते पल
सहेजे जो आँखों ने
बूँदों में ढले।

~अनिता ललित





Sunday, 28 August 2016

**~दोहे--अपने देते तोड़! ~**

रिश्तों की बोली लगे, कैसा जग का खेल 
मतलब से मिलते गले, भूले मन का मेल।। 

फूल कहे 'ना त्यागिये!', ये काँटों का हार 
अपनों का उपहार यह, इस जीवन का सार।। 

अपनों ने कुछ यूँ छला, छीना प्रेम-उजास 
अश्कों में बहने लगी, मन की हर इक आस।। 

सुख और दुख के वास्ते, क्या अवसर क्या मोड़
अपने ही हैं बाँधते, अपने देते तोड़।। 

मन पंछी उड़ता गगन, बाँध सकेगा कौन 
कोलाहल मिटता सदा, मुखरित हो जब मौन।। 

घायल मन, साँसें विकल, मिलता दर्द अपार
आँसू नयन समाए न, यही प्रीत-उपहार।। 

बेटी शीतल चाँदनी, है ईश्वर का नूर 
कोमल मन, निश्छल हँसी, करे अँधेरा दूर।। 

दिल में मीठी याद ले, चलती हूँ दिन-रात
चुभते काँटों की कसक, अब लगती सौग़ात।। 


Tuesday, 23 August 2016

**~मधुर तेरी तान~** --चोका

ओ मेरे कान्हा!
तू है मेरा सहारा 
पालनहारा !
तू ही खेवनहारा।
मोर मुकुट !
तेरा रूप सलोना
दिल लुभाए
हो जग उजियारा !
आँसू की धार, 
जीवन मँझधार,
बंसी की धुन 
है पतवार मेरी ! 
ये प्यारी हँसी
दुःख-दर्द निवारी। 
मेरा जीवन 
है तुझको अर्पण। 
मैं हूँ निश्चिन्त 
आ के तेरी शरण। 
मुरलीधर! 
मधुर तेरी तान!
मुझे शक्ति दो 
मेरी विपदा हरो। 
राह दिखाओ !-
सद्कर्म मेरे 
बनें पूजा-अर्चना 
तेरी भक्ति-तराना।