Monday, 7 April 2014

**~काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे' का लोकार्पण ~** -भाग-१~'सूचना एवं निमंत्रण पत्र'

मेरे पहले काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे' का लोकार्पण १२ अप्रैल २०१४ को 

~अनिता ललित 


Tuesday, 11 February 2014

~**प्यार कब नहीं होता फ़ज़ाओं में ?**~

आसमाँ से बिखरता हल्दी-कुंकुम-महावर,
हवा के मेहँदी लगे पाँवों में उलझती … 
सुनहरी पाजेब की रुनझुन,
आँचल में लहराते-सिमटते चाँद-सितारे,
सुर्ख़ डोरों से बोझिल … 
क्षितिज पर झुकती बादलों की पलकें,
फूलों से टँकी रंग-बिरंगी चूनर की ओट में … 
लजाते हुए धरा के सिन्दूरी गाल ....

~प्यार कब नहीं होता फ़ज़ाओं में ?
काश! हम इंसान बिना शर्तों के प्यार कर पाते...~

Tuesday, 21 January 2014

**~बादलों की आँखें ~**


Photo: Anita Lalit



गरजे मेघ,
सूरज भागा, छिपा 
दूसरे देश।

चीखे बादल, 
थर-थर काँपती 
भोर है आई। 

धरा है भीगी,
बादलों की आँखें भी 
हुई हैं गीली।  

मन  है रोया 
ग़रीबी की आड़ में 
मानव खोया। 

देखो ठिठुरी 
ग़रीब की झोंपड़ी 
जमी, पिघली। 

Sunday, 22 December 2013

~** अब कोई ख्वाब नहीं उगता ... **~

Photo: Anita Lalit

एहसासों की सूनी चौखट पर ...
अब कोई चाँद नहीं रुकता
दिल की इस बंजर ज़मीं पर...
अब कोई ख्वाब नहीं उगता..!

एक सन्नाटा गूँजता है...
वीरान हुई इन आँखों  में...
बर्फ़ीली पगडंडी पर जैसे...
कोई खामोश कहानी ...
चहलक़दमी करती हो...!

एक सेहरा झुलसता है...
सूखे हुए इन होठों पर...
रौंद... पैरों के निशाँ जैसे....
खुद मंज़िल प्यासी...
बेमक़सद भटकती हो !

एक तूफान सा उठता है...
डूबे हुए इस वजूद में..
जज़्बातों की चीखें जैसे...
छटपटाती...
दम तोड़ती...घुटती हों ....!

एक चेहरा सिहरता है...
बेजान सी ज़िंदगी में...
सिर छुपाए घुटनों में जैसे...
साँसों की धड़कन...
सिसकती हो...!

Monday, 25 November 2013

**~'दीपशिखा सी....~** -चोका

दीपशिखा सी
जलती हरदम
तेरे आँगन
कुछ यूँ सुलगती
मैं पिघलती
अंदर ही अंदर!
आँसू में डूबे  
अरमान जलते
और फैलता 
उदासी का उजाला
तन्हाई ओढ़े!
सुलगते जो ख़्वाब,
सभी हो जाते
ख़ामोश, धुआँ-धुआँ
भीगता वो आँगन!