Sunday, 12 May 2019
माँ सी रज़ाई ~ हाइकु
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आज मातृ दिवस है! मगर इस बार माँ शारीरिक रूप में मेरे साथ नहीं है। हालाँकि सदा की तरह वह हर क्षण मेरे दिल में, मेरे बहुत-बहुत-बहुत ...बहुत क़...
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Monday, 6 May 2019
पाँव छिले हैं! ~ताँका
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1 कैसे गिले हैं ! ज़हरीले काँटों से- पाँव छिले हैं ! वक़्त ने उगाए जो, दिल में वो चुभे हैं ! 2 तुम जो रूठे यादें ठहर गईं ...
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Tuesday, 30 January 2018
डस्टबिन -लघुकथा
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छह-सात वर्षीया पिंकी अपने गुड़िया-गुड्डे लेकर , कमरे में अपने सुंदर से डॉल-हाउज़ के पास बैठकर , मगन होकर खेल रही थी -छोटे-छोटे बर्तन , मे...
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Saturday, 1 July 2017
शब्द-निष्ठा सम्मान 2017 के अंतर्गत मेरी लघुकथा 'रस्म' चौवालिसवें (44) स्थान पर
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साहित्यकार -चिकित्सक डॉ अखिलेश पालरिया (अजमेर) द्वारा आयोजित शब्द निष्ठा सम्मान 2017 के अन्तर्गत लघुकथा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इ...
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Wednesday, 8 March 2017
~** मैं एक स्त्री हूँ! **~
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भावनाओं में सिमटी ; भावनाओं से लिपटी ; भावनाओं की गीली मिट्टी से गुँधी हुई हूँ ! भावनाओं में ही - बसती हूँ, बहती हूँ; जीती हूँ, मरती ...
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